करुणामय राजनीति

विश्वभर में लोकतंत्र का पतन हो रहा है। कई देशों में धुर दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं, वहीं हर जगह चुनाव प्रक्रिया में अनियंत्रित देशों द्वारा हस्तक्षेप की आशंका बढ़ती जा रही है। इसका परिणाम राजनीति में अविश्वास और समाज में विभाजन के रूप में सामने आ रहा है। इस पैनल चर्चा में हम इस बात पर विचार करेंगे कि करुणा किस प्रकार मार्गदर्शक भूमिका निभा सकती है, जिससे न केवल लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति समर्थन को पुनर्जीवित किया जा सके, बल्कि ऐसे राजनीतिक तंत्रों का निर्माण भी किया जा सके जो समावेशी, सहयोगात्मक और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में प्रभावी हों।.